रविवार, 25 जुलाई 2021

कविता ,नया मानव बना दो तुम

सुनो संभू मेरे महादेव अब इतना कारा दो तुम,
बहुत महंगा हैं अब ज़माना नया मानव बना दो तुम,
तुम्हारे इस जगत में तो  बड़ी ही मारा मारी है,
बड़ी जंजाल ये दुनिया बचाना जान भारी है,
अगर हो जाए ये दुनिया कोभी काशी बनाना तुम,
बहुत महंगा जमाना है नया मानव बना दो तुम,
तुम्हारा नाम ले संभु तो सारी भुख उड मिट जाए,
तुमहारा ध्यान करले मन में जो बिन पंख उद जाए
हर एक के हो तुम मुखिया  वही सब घर बना दो तुम
जहां सत्संग हो शिव का , ह्रदय गंगा बना दो तुम,
सुनो तिरलोक के स्वामी एक ऐसा जग की माया हो
जहां पापी ना शापी हो प्रभू बस तुमरी छाया हो,
मुझे भी उस ज़माने का प्रभू मानव बना दो तुम,
बहुत महंगा ज़माना है नया मानव बना दो तुम
  


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