चुपचाप रेहेता हु तो वो कमज़ोर समझ ते है
जवाब देता हूं तो कठौर समझते है
साथ देता हूं तो नटखोर समझते हैं
इस लिए कमज़ोर ही बना रहने में भलाई है
ज्यादा बोल जाता हूं तो कोई और समझ लेते है
Hi friends my name PT KK VATS, write blogs, make my own, do not copy anyone& poetry, apart from this, I also write stories,Once you visit my blog, you will like it, because whatever I write, I write my heart. thanks & welcome
फिर भी भयभीत ।
मैं काली हूं कंकाली
काल पे भी मेरी जीत।
पैर रख दिया जमी पर
में भय पर छा गई।
तूने याद किया दिल से
ओर मां आगई
नमस्कार दोस्तों आज बात करते है ट्रेंड की क्यों आज कल जो भी फैमस होता है लोग उसे ट्रेंड बना देते है, रहने सहन, खानपान, से लेके भगवान को भी ...